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फेसबुक

ओ फेसबुक, आओ ना
करीब और करीब, थोड़ा और

दो जिस्म एक जान होना नहीं समझते क्या ?
तुम्हारे तो लाखों हिन्दी यूजर्स हैं
उन्होंने बताया नहीं 
कि विरह में तड़पना क्या होता है ?
नजदीक आने पर सांसों में गांठ लगाकर लेट जाना
कितना सुखद होता है ?
मैं तुम्हारे साथ वही करना चाहती हूं
फेसबुक.
मैं तुम्हारे साथ फोर प्ले
( लाइक, टैग, शेयर, अपडेट ) करना चाहती हूँ
उस मदहोश पार्टनर की तरह 

जिसकी अधखुली आंखें
आफ्टर सेव से पुते चेहरे पर जाकर ठहर जाती है.
जिसके हाथ हमेशा उतार-चढ़ाव के बीच
संतुलन बनाए रखने के लिए सक्रिय रहते हैं.
मैं अपनी आंखों में वही मदहोशी चाहती हूं
उंगलियों में वही तड़प 
कि तुम्हारे कमान्डस और हायपर पर पड़ें
तो तुम रात के सन्नाटे में सिसकारियां भरने लगो
एक फेसबुक यूजर की तड़प तुम नहीं समझोगे फेसबुक
नहीं समझोगे 
कि तुमने मेरी मरती हुई इच्छाओं को कैसे हरा किया है ?
कैसे तुमने मुझ पर वो जादू किया 
कि मैं तुम्हें आखिर कमिटेड सोलमेट मानने लगी हूं.
मैंने आर्कुट को कभी मुंह नहीं लगाया
मुझे वो शुरु से ही कोल्ड और एचआइवी पॉजिटिव लगा
थोड़ी उम्मीद बज़ से बंधी थी
पर वो जल्द ही शीघ्रपतन का शिकार हो गया.
मैं ब्लॉग,वेबसाइट,माइक्रो अपडेट्स में
पन्ने दर पन्ने भटकती रही 
लेकिन
भीतर की आग
लैप्पी के एग्जॉस्ट फैन की हवा में
और सुलगती रही.
जब तुम मेरी ज़िन्दगी में आए
स्काई ब्लू और व्हाइट से सजा गठीला शरीर देखकर ही
समझ गई कि तुम बहुत देर तक स्टे करोगे 
और मैं फ्लो-स्लो की पीड़ा से हमेशा के लिए  मुक्त हो जाउंगी.
ऐसा ही हुआ फेसबुक
सच्ची ऐसा ही हुआ.
मेरी सारी मरी इच्छाएं, अधूरे ख्बाब, टूटते सपने
एक-एक करके हरे और खड़े होने लगे 
मैं तुममे डूबती चली गयी
इतना भी पता नहीं चला
कि मैं अपने ब्वायफ्रेंड  के बिना तो जी सकती हूं
पर तुम्हारे बिना हरगिज नहीं.
उसकी बांहो में होते हुए भी
उंगलियां तुम पर ही नाचती हैं.

लेकिन
तुम नेटवर्क के मोहताज क्यों हो फेसबुक ?
मुझे डिपेंडेंट मेट बिल्कुल पसंद नहीं
जिसका वजूद इंटरनेट के होने पर टिका हो !
तुम उससे अलग होकर भी क्यों नहीं तन सकते
क्यों तुम अपने पापा जुकरवर्ग से नहीं कह सकते -
" पापा तन की खूबसूरती मेरे टाइमलाइन करने में नहीं
मुझे ऑफलाइन हग किए जाने में  है."                                                                                                  तुम मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकते फेसबुक?

                       
   (उस लड़की के लिए जो चाहे किसी के बिना जी ले, फेसबुक के बिना नहीं जी सकती )
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11 Response to 'फेसबुक के लिए एक प्रेम/सेक्स/अश्लील (!) कविता'
  1. गिरीन्द्र नाथ झा
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326267375484#c8564710330855770585'> January 11, 2012 1:06 PM

    मैं खुद इंटरनेट एडिक्ट हूं, फेसबुक मेरे लिए सीऱफ की तरह है..जिसे सर्दी भगाने के लिए पीना जरुरी है..। पूरी बात पढ़ी आपकी..क्या कहें जान फूंक दिए हो आप नेटवर्क में..अबतक तो हम नेटवर्क को संस्कृति कहते थे..इसे पढ़ने के बाद 'जान' कहने लगे हैं।

     

  2. Sandip Naik SAM
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326270273737#c6125623075965362565'> January 11, 2012 1:54 PM

    excellent Vineet you are just genius Dude.............Keep it up
    Sandip Naik

     

  3. सागर
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326271331046#c4555334258227462764'> January 11, 2012 2:12 PM

    आइडिया तो बहुत अच्छा है सर जी. तस्वीर लाजावाब है. कल्चर के खिलाफ ही... लेकिन कविता के नाम पर लफ्फाजी है. नहीं जंची

     

  4. प्रवीण पाण्डेय
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326271371508#c6014706868380344646'> January 11, 2012 2:12 PM

    विडम्बना है, भावनाओं का व्यापार है यह..

     

  5. Abhishek Anand
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326275568156#c4102542762624238190'> January 11, 2012 3:22 PM

    पूरा पढ़ा | दावा कर सकता हूं सर जी इस पर खूब हिट्स मिलेंगे.. | नया चीज है | बिलकुल नया |

     

  6. sajhamorcha
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326281129662#c1170535597688931516'> January 11, 2012 4:55 PM

    प्रेम, श्रिंगार, विरह और प्राप्ति एक साथ व्यक्त ...बढियां है विनीत जी ...मजा आ गया ... एक बात जरुर कहना चाहूँगा आपकी सोंच नई होती है और ये कविता उसी का प्रमाण है ...जबरदस्त

     

  7. काजल कुमार Kajal Kumar
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326331377981#c1062273486588370906'> January 12, 2012 6:52 AM

    बल्ले बल्ले

     

  8. राजेश उत्‍साही
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326339628245#c6861911862075304210'> January 12, 2012 9:10 AM

    नई दृष्टि से फेसबुक।

     

  9. Viral Trivedi
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326628817297#c4316551890560266939'> January 15, 2012 5:30 PM

    maja aa gaya.

     

  10. Viral Trivedi
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326628855861#c1554089347771985976'> January 15, 2012 5:30 PM

    maja aa gaya.

     

  11. Viral Trivedi
    http://www.hunkaar.com/2012/01/blog-post_2745.html?showComment=1326628950343#c9151357323589071463'> January 15, 2012 5:32 PM

    maja aa gaya.

     

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